जीवन घना जंगल 06/09/2009

काली तेरी कोठरी, रंग वहां खो जाए।
माया मोह व काम हैं, सबके मन को भाय॥

जीवन जंगल घना है, लगते पलपल घाव।
जीत घमंड बढ़ा देती, फंसते दलदल पाँव॥

हार मनुष्य का तोड़ती, साहस का अहसास।
वार समय का तौलता, मानव का विश्वास॥

कहते संत-फ़कीर हैं, तंग बड़ा वह छेद।
जिससे ज्ञान लकीर है, खोले भेद-अभेद॥

कर्म-धर्म का संतुलन, और समय का भान।
फल की चिंता ना करें, यह गीता का ज्ञान॥

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