हर इंसान सनम है... 20/06/2009

मेरे पास वक्त बहुत कम है,
एक तेरी ही आँख नम है।

इश्क को करने दो इन्तजार,
कामयाबी बस चार कदम है।

चुभे है इतने नश्तर सीनों में,
मुहब्बत ही आज का धरम है।

मैं निकला हूँ जीतने दुनिया,
दिल में प्यार, हाथ में कलम है।

एक तेरी बाहें मुझे है नामंजूर,
मेरा तो हर इंसान सनम है।

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